स्वार्थ में अब आजकल डूबा है ऐसा आदमी |
बन गया है ख़ुद-ब-ख़ुद व्यापार जैसा आदमी |
भूल नैतिकता को, डूबा आकंठ भ्रष्टाचार में,
है बनाने में जुटा पैसा ही पैसा आदमी ||
----- डॉo अशोक मधुप
हिंदी के सुधी पाठकों के लिए प्रतिष्ठित कवि-गीतकार-ग़ज़लकार-अभिनेता एवं ज्योतिष विशेषज्ञ डॉo अशोक मधुप के गीत, ग़ज़ल, मुक्तक एवं कविताओं का अनूठा संग्रह |
गीत ***** शताब्दी का संकल्प **************** शताब्दी का ये पावन क्षण, जागा फिर विश्वास है। सेवा, समर्पण, राष्ट्रधर्म—यही हमारी आस है। संघ ...
0 comments:
Post a Comment