मुक्तक
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जिस जानिब से सर पर मेरे, आकर के पत्थर निकले |
मुड़कर देखा जब मैंने तो, यारों ही के घर निकले |
दर्द ग़मों का किसी गली में, आये तुमको नज़र कहीं,
'मधुप' के घर को समझ लो यारों,जाकर वही डगर निकले |
डॉ. अशोक मधुप, वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकार एवं अभिनेता। राष्ट्रीय अध्यक्ष, कायाकल्प साहित्य कला फ़ाउण्डेशन, नोएडा। परमपूज्य गुरुदेव अन्तर्राष्ट्रीय कवि, गीतसम्राट, पद्मविभूषण डा. गोपालदास नीरज। अन्तर्राष्ट्रीय शायरे-आज़म डॉ. गुलज़ार देहलवी।
हिंदी के सुधी पाठकों के लिए प्रतिष्ठित कवि-गीतकार-ग़ज़लकार-अभिनेता एवं ज्योतिष विशेषज्ञ डॉo अशोक मधुप के गीत, ग़ज़ल, मुक्तक एवं कविताओं का अनूठा संग्रह |
(भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती एवं शिक्षक दिवस पर विशेष प्रस्तुति) गीत ***** गुरु! तुमसे ही उजियारा *...
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