मुक्तक

मुक्तक

 मुक्तक  *******                   (1) किस तरह के आवरण में ढल रहा है आदमी। नित नए एक वातावरण में पल रहा है आदमी। डालकर नकली मुखौटा आजकल देखो...
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मुक्तक

मुक्तक

 मुक्तक *******                (1) गीत ही मेरे दुनियादारी, गीत ही मेरे हैं जीवन। धन की नहीं लालसा मुझको, गीत ही मेरे तन-मन-धन। ग़ज़ल-वज़ल न आये...
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गीत - हे गुरु! तुमसे ही उजियारा

(भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती एवं शिक्षक दिवस पर विशेष प्रस्तुति)              गीत             ***** गुरु! तुमसे ही उजियारा *...