ग़ज़ल

ग़ज़ल

 ग़ज़ल ******** तुम चले जाओगे 'गर रूठ के बादल की तरह। हम मना लेंगे तुम्हें प्यार में पागल की तरह। दर्द रह-रह के कसकता है जुदाई का तेरी, ते...
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ग़ज़ल

ग़ज़ल

आग दिल में लगी, किस क़दर देखिये। जल गया है मेरा घर का घर देखिये। एक ख़ुश्बू फ़िज़ा में घुली हर तरफ़, कोई गुज़रा है महताब इधर देखिये। हक़परस्तों का ...
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मुक्तक

 जिस जानिब से सर पर मेरे, आकर के पत्थर निकले। मुड़कर देखा जब मैंने तो यारों ही के घर निकले। दर्द ग़मों का किसी गली में, आये तुमको नज़र कहीं, ...