मुक्तक

मुक्तक

 जिस जानिब से सर पर मेरे, आकर के पत्थर निकले। मुड़कर देखा जब मैंने तो यारों ही के घर निकले। दर्द ग़मों का किसी गली में, आये तुमको नज़र कहीं, ...
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गीत - हे गुरु! तुमसे ही उजियारा

(भारतरत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयन्ती एवं शिक्षक दिवस पर विशेष प्रस्तुति)              गीत             ***** गुरु! तुमसे ही उजियारा *...