ग़ज़ल
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तुम चले जाओगे 'गर रूठ के बादल की तरह।
हम मना लेंगे तुम्हें प्यार में पागल की तरह।
दर्द रह-रह के कसकता है जुदाई का तेरी,
तेरी यादों में तड़पता हूँ मैं घायल की तरह।
फिर न लग जाए मेरे प्यार को दुनिया की नज़र,
अपनी आँखों में सजा लो मुझे काजल की तरह।
अब न खो जायें 'मधुप' फिर से ग़मे-फ़ुरकत में,
अपने सीने से लगा लो मुझे आँचल की तरह।
डॉ. अशोक मधुप,
वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकार एवं अभिनेता।
नोएडा।
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