गीत - नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!

 नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!

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हे युगदृष्टा, हे युगसृष्टा,

हे कालजयी नयनाभिराम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!! 


तुम आज़ादी के क्रान्तिदूत,

भारत माँ के असली सपूत।

आज़ाद-हिन्द सेनानायक,

तुम विश्व शान्ति के उन्नायक। 


तुमने दुनिया में भारत का,

कर दिया ख़ूब उन्नत ललाम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!! 


तुम भारत माँ के नौनिहाल,

चल पड़े क्रान्ति के ले मशाल।

बज उठी हर तरफ़ रणभेरी,

तोड़ने गुलामी की बेड़ी। 


सदियों तक याद करेगा जग,

तुमने ऐसा कर दिया काम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!! 


सुन करके मातृ करुण क्रन्दन,

कर दिया समर्पित तन-मन-धन।

थी माँ जकड़ी जंज़ीरों से,

तुमने टक्कर ली गोरों से। 


जब निकल पड़े दो पग तेरे,

गौरव हित निकले कोटि गाम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!!


धधकाई तुमने जो मशाल,

थी आज़ादी की विषम ज्वाल।

तुमने निर्वाह किया नाता,

स्वाधीन हुई भारत माता। 


तेरा गौरव गुणगान करें,

सूरज-चन्दा सब सुबह-शाम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!! 


असमय नियति ने कर प्रहार,

कर दी मानवता तार-तार।

हिल गया विश्व सब दिग-दिगन्त,

तुम अजर-अमर युग-युग अनन्त। 


भारत के अमर शहीदों में,

सर्वोपरि तेरा एक नाम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!! 


स्वाधीन हिन्द के आठ दशक,

तुम पर न्योछावर हैं अब तक।

स्वर-सुमनों की यह भावांजलि,

स्वीकारो मेरी श्रद्धांजलि। 


हे कीर्ति-पुंज पौरुष-प्रतीक,

तेरी स्मृति है पुण्य-धाम।

हे चिरशाश्वत इतिहास-पुरुष,

नेता सुभाष शत् शत् प्रणाम!!

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©सर्वाधिकार सुरक्षित।

पूर्णतया मौलिक एवं स्वरचित।

  डॉ. अशोक मधुप,

वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकार एवं अभिनेता।

नोएडा।

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