गीत
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प्यार कर लेना
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प्यार कर लेना किसी से भी सरल है प्रियतम!
पार तक उसको निभाना ही कठिन है लेकिन।
प्यार-प्रणयन तो किया साथ मेरे, ऐ हमदम!
प्यार को मेरे मगर दिल में बसाया ही नहीं।
कोई अनुबन्ध नहीं प्यार में होता है कभी,
करके अनुबन्ध मगर तुमने निभाया ही नहीं।
मेरे इस प्यार को ठुकराना सरल है प्रियतम,
दिल से यादों को मिटाना ही कठिन है लेकिन।
तुम यौवन की हो लहराती सी कोमल लतिका,
मैं हूँ पर दर्द भरे पतझड़ का कोई सूनापन।
तुम पर रहती हैं बहारें भी सदा न्योछावर,
मेरे जीवन में मगर आया है विरही सावन।
फूल यौवन का खिला लेना सरल है प्रियतम!
उसको काँटों से बचाना ही कठिन है लेकिन।
एक राही ही कोई बनता है जीवनसाथी,
हर बटोही से मगर प्यार नहीं है अच्छा।
एक भौंरा ही भले फूल को मोहित कर ले,
साथ भौंरों के कई अभिसार नहीं है अच्छा।
किसी को दिल में बसा लेना सरल है प्रियतम!
उम्रभर साथ बिताना ही कठिन है लेकिन।
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©सर्वाधिकार सुरक्षित। पूर्णतया मौलिक एवं स्वरचित।
डॉ. अशोक मधुप,
वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकार एवं अभिनेता।
नोएडा।

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