गीत - श्याम आए मेरे आँगन

 (भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर विशेष प्रस्तुति)

गीत

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श्याम आए मेरे आँगन

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श्याम आए मेरे आँगन,

आज गगन में चाँद खिला है।

मन में मधुर उजास,

नंद के घर आनंद भयो है।

आए नंदलाल आज।

आए नंदलाल आज...

मेरे मन के द्वार। 


कारा की उस अँधियारी में,

ज्योति स्वयं मुस्काई।

बंधन टूटे, द्वार खुले सब,

जब हरि ने ली अँगड़ाई।

यमुना भी चरण पखारने,

बन बैठी थी धार—

नंद के घर आनंद भयो है,

आए नंदकुमार। 


माथे मोर-मुकुट की छाया,

अधर बसी मुस्कान।

नन्हे-नन्हे चरणों में जैसे,

बसता सारा जहान।

माँ यशोदा की आँखों में,

उमड़ा प्रेम अपार—

श्याम आए मेरे आँगन,

लेकर प्रेम-पुकार। 


गोकुल की गलियों में गूँजी,

मुरली की पहली तान।

ग्वाल-बाल सब दौड़े आए,

नाचे सारा धाम।

राधा के मन में बज उठी फिर,

अनहद प्रेम-झंकार—

श्याम आए मेरे आँगन,

लेकर प्रेम-फुहार। 


माखन की मटकी क्या टूटी,

टूटे मन के बंध।

तेरी एक हँसी में कान्हा, 

मिल जाए आनंद।

जिसने तुझको मन से पुकारा,

तू उसका रखवाला—

तेरे नाम से मिट जाएँ,

जीवन के अँधियारे। 


हे मुरलीधर! मेरे भीतर,

ऐसी भी इक रात हो।

मन की सारी कालिख धुल जाए,

तेरी कृपा की बात हो।

अंतर में वृंदावन महके,

होठों पर तेरा नाम—

हर धड़कन में राधे-कृष्ण,

हर साँस में घनश्याम। 


आज नहीं बस गोकुल में तू,

मेरे हृदय में आना।

सूने मन की सूनी डाली पर,

प्रेम-कुसुम खिलाना।

तेरी बाँसुरी राह दिखाए,

तेरा प्रेम आधार—

नंद के घर आनंद भयो है,

आए नंदकुमार।

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©सर्वाधिकार सुरक्षित।

पूर्णतया मौलिक एवं स्वरचित।

डॉ. अशोक मधुप,

वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, ग़ज़लकार एवं अभिनेता।

नोएडा।

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