स्वार्थ में अब आजकल डूबा है ऐसा आदमी |
बन गया है ख़ुद-ब-ख़ुद व्यापार जैसा आदमी |
भूल नैतिकता को, डूबा आकंठ भ्रष्टाचार में,
है बनाने में जुटा पैसा ही पैसा आदमी ||
----- डॉo अशोक मधुप
हिंदी के सुधी पाठकों के लिए प्रतिष्ठित कवि-गीतकार-ग़ज़लकार-अभिनेता एवं ज्योतिष विशेषज्ञ डॉo अशोक मधुप के गीत, ग़ज़ल, मुक्तक एवं कविताओं का अनूठा संग्रह |
आग दिल में लगी, किस क़दर देखिये। जल गया है मेरा घर का घर देखिये। एक ख़ुश्बू फ़िज़ा में घुली हर तरफ़, कोई गुज़रा है महताब इधर देखिये। हक़परस्तों का ...
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