हमने क्या क्या मंज़र देखे |

हमने क्या क्या मंज़र देखे | ढहते - गिरते खंडहर देखे | हरे -भरे थे खेत जहाँ पर, आज वहाँ पर बंजर देखे | प्यासी नदिया, ठंडी गर्मी, सूखे  हुए  ...
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ग़ज़ल

आग दिल में लगी, किस क़दर देखिये। जल गया है मेरा घर का घर देखिये। एक ख़ुश्बू फ़िज़ा में घुली हर तरफ़, कोई गुज़रा है महताब इधर देखिये। हक़परस्तों का ...