स्वार्थ में अब आजकल डूबा है ऐसा आदमी |
बन गया ख़ुद-ब-ख़ुद व्यापार जैसा आदमी |
भूल नैतिकता को, डूबा आकंठ भ्रष्टाचार में, 
है  बनाने  में  जुटा  पैसा  ही  पैसा  आदमी ||

----- डा० अशोक मधुप
     (गीतकार, ग़ज़लकार, अभिनेता एवं निर्देशक)
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ग़ज़ल

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